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खुले आस्था के द्वार ! — भक्तों के बिना ही खुले आस्था के सर्वोच्च तीर्थ बैकुंठ धाम बद्रीनाथ के कपाट भी…

आखिरकार आस्था के सर्वोच्च तीर्थ, बैकुंठ धाम बद्रीनाथ के कपाट 6 माह की इंतजारी के बाद ब्रह्ममुहूर्त पर आज सुबह 4 बजकर 15 मिनट पर आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गयें हैं। इस बार बैकुंठ धाम के कपाट भक्तों के बिना ही खोले गये। अब आगामी 6 महीने तक आम श्रद्धालु भगवान बद्रीनाथ के दर्शन कर पाएँगे। भले ही कपाट खुलने के बाद विगत 6 महीनों से धाम में पसरा सन्नाटा टूट गया हो लेकिन भक्तों के बिना कपाट खुलने पर भी बैकुंठ धाम में चारों ओर सन्नाटा ही दिखाई दिया। कोरोना संकट की वजह से कपाट खुलने के अवसर पर बद्रीनाथ के रावल, मंदिर के हकहकूधारी और देवस्थानम बोर्ड के लोग सीमित संख्या में उपस्थित थे। कपाट खुलने पर सोशल डिस्टेंस का पूरी तरह से पालन किया गया। गौरतलब है कि बहुनि संति तीर्थानि, दिविभूमौं रसासु च, बदरी सदृशं तीर्थ, न भूतो न भविष्यति’ अर्थात स्वर्ग और धरती पर असंख्य तीर्थ हैं, लेकिन बद्रिकाश्रम सरीखा तीर्थ न तो कोई है, न होगा ही। यह तीर्थ धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष जीवन के चारों पदार्थो को देने वाला है। नर-नारायण पर्वत के मध्य स्थित श्री बदरीनाथ को भगवान विष्णु का अवतार माना गया है। धर्मग्रंथों में उल्लेख है कि गंगाजी ने जब स्वर्ग से धरती के लिए प्रस्थान किया तो उसका वेग इतना तेज था कि संपूर्ण मानवता खतरे में पड़ जाती। इसलिए गंगाजी 12 पवित्र धाराओं में बंट गई। इन्हीं में एक है अलकनंदा, जिसके तट पर बद्रिकाश्रम स्थित है। समुद्र तल से 3133 मीटर की ऊंचाई पर चमोली जनपद में स्थित इस मंदिर का निर्माण 8वीं सदी में आद्य गुरु शंकराचार्य ने करवाया। बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड के साथ ही साथ देश के चार धामों में से भी एक है। इस धाम के बारे में यह कहावत

Hema Negi Karasi